इलायची में है कैंसररोधी तत्व, जानें इसके 9 गुण
इलायची हर भारतीय घरों की रसोई का अहम हिस्सा
है। आम तौर पर मसालों की तरह इस्तेमाल में आने वाली इलायची माउथ फ्रेशनर के तौर पर
भी यूज़ में लायी जाती है। इलायची का वानस्पतिक नाम एलाट्टारिया कार्डोमोमम है।
वैसे तो इलायची को व्यंजनों में सुगंधदायक मसाले के तौर उपयोग में लाया जाता है,
लेकिन ग्रामीण अंचलों में बुजुर्ग लोग औषधीय गुणों से भरपूर
होने के नाते इसे अनेक बीमारियों में भी इस्तेमाल करते हैं। चलिए, आज जानते हैं इससे जुड़े हर्बल नुस्खों के बारे में।
इलायची के संदर्भ में रोचक जानकारियों और परंपरागत हर्बल ज्ञान का जिक्र कर रहे हैं डॉ. दीपक आचार्य (डायरेक्टर-अभुमका हर्बल प्रा. लि. अहमदाबाद)। डॉ. आचार्य पिछले 15 सालों से अधिक समय से भारत के सुदूर आदिवासी अंचलों जैसे पातालकोट (मध्य प्रदेश), डांग (गुजरात) और अरावली (राजस्थान) से आदिवासियों के पारंपरिक ज्ञान को एकत्रित कर उन्हें आधुनिक विज्ञान की मदद से प्रमाणित करने का कार्य कर रहे हैं।
इलायची के संदर्भ में रोचक जानकारियों और परंपरागत हर्बल ज्ञान का जिक्र कर रहे हैं डॉ. दीपक आचार्य (डायरेक्टर-अभुमका हर्बल प्रा. लि. अहमदाबाद)। डॉ. आचार्य पिछले 15 सालों से अधिक समय से भारत के सुदूर आदिवासी अंचलों जैसे पातालकोट (मध्य प्रदेश), डांग (गुजरात) और अरावली (राजस्थान) से आदिवासियों के पारंपरिक ज्ञान को एकत्रित कर उन्हें आधुनिक विज्ञान की मदद से प्रमाणित करने का कार्य कर रहे हैं।
इलायची में कैंसररोधी रसायन जैसे इंडोल-3,
कॉर्बीनोल, डायइन्डोलिल मिथेन आदि पाए
जाते हैं। इन्हें कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि रोकने में सक्षम माना गया है।
पान के ताजे हरे पत्ते में इलायची के दाने
मिलाकर खाने से सिर चकराने, घबराहट और जी मिचलाने जैसी
शिकायतों में आराम मिलता है। उल्टी होने के बाद दो चार-दाने इलायची के चबाने से
मुंह का स्वाद बदलता है और राहत भी मिल जाती है।
पातालकोट में आदिवासी हर्रा के बीजों का चूर्ण
(1 चम्मच), एक या दो इलायची का चूर्ण और थोड़ी-सी अजवायन
मिलाकर अपच की समस्या होने पर रोगियों को देते हैं। माना जाता है कि यह नुस्खा
पाचन प्रक्रिया को सुचारु करता है।
आदिवासियों के अनुसार, काली मूसली (5-10 ग्राम), बादाम (एक या दो), चिरौंजी के दाने (2 ग्राम) और तीन इलायची को मिलाकर पेस्ट
बना कर रोज रात सोने से पहले खाने पर पुरुषों की नपुंसकता की समस्या धीरे-धीरे दूर
हो जाती है।
6-डांग- गुजरात के आदिवासियों के अनुसार, तीन से चार इलायची, छुईमुई की जड़ें (2 ग्राम), सेमल की छाल (3 ग्राम) को मिलाकर पेस्ट बना कर एक गिलास दूध के साथ प्रतिदिन रात को सोने से पहले पीने से पौरुष शक्ति बढ़ती है और वीर्य गाढ़ा होता है।
6-डांग- गुजरात के आदिवासियों के अनुसार, तीन से चार इलायची, छुईमुई की जड़ें (2 ग्राम), सेमल की छाल (3 ग्राम) को मिलाकर पेस्ट बना कर एक गिलास दूध के साथ प्रतिदिन रात को सोने से पहले पीने से पौरुष शक्ति बढ़ती है और वीर्य गाढ़ा होता है।
जिन लोगों को पेशाब होने के समय दर्द या कठिनाई
की शिकायत होती है, उन्हें विदारीकंद, लौंग और इलायची की समान मात्रा लेकर दिन में तीन बार चबाना
चाहिए। इससे यह समस्या धीरे-धीरे खत्म हो जाती है।
8-पेशाब से जुड़ी अनेक समस्याओं में राहत के लिए डांग-गुजरात के आदिवासी मीठी नीम की जड़ों का रस तैयार करते हैं। रस की 20 ग्राम मात्रा में दो चुटकी इलायची दानों का चूर्ण मिलाकर रोगियों को देते हैं। इससे तेजी से आराम मिलता है।
8-पेशाब से जुड़ी अनेक समस्याओं में राहत के लिए डांग-गुजरात के आदिवासी मीठी नीम की जड़ों का रस तैयार करते हैं। रस की 20 ग्राम मात्रा में दो चुटकी इलायची दानों का चूर्ण मिलाकर रोगियों को देते हैं। इससे तेजी से आराम मिलता है।
इलायची को एक बेहतरीन डेटॉक्स भी माना जाता है,
क्योंकि इसके सेवन से मूत्रत्याग की प्रक्रिया में तेजी आती
है। इसके सेवन से पेशाब तंत्र, किडनी और ब्लाडर से लवण,
अधिक पानी और कई तरह के टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं।
Comments
Post a Comment